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* सभी यंत्रो में श्रेष्ठ एसा माँ भगवती त्रिपुरासुंदरी का यंत्र स्वरुप श्री यंत्र है, इस महायंत्र की उपासना और आराधना से भौतिक और आर्थिक समस्याएँ समाप्त हो जाती है. विधि-विधान और प्राण-प्रतिष्ठित श्री यंत्र की स्थापना घर में या व्यापार के स्थान पर करने से अनेको प्रकार के सुक्ष्म वास्तुदोष का निवारण होता है.
!! ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलाये प्रसीद प्रसीद
श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम: !!
* इस बीज मंत्र और श्री सूक्तम के पाठ करना. पवित्रता रखना. श्री यंत्र की दैनिक पूजा परम कल्याणकारी है.
* श्री यंत्र सामान्य रुप से तीन प्रकार के होते है. १) समतल श्री यंत्र २) मेरुपृष्ठ श्री यंत्र ३) कूमपृष्ठ श्री यंत्र.

२)
मेरुपृष्ठ श्री
यंत्र
* भृपुष्ठ में मध्य बिंदु से उपर की तरफ़ उपसाया श्री यन्त्र को मेरुपृष्ठ श्री यन्त्र कहा जाता है. मेरुपृष्ठ श्री यन्त्र की पूजा उत्तम मानी जाती है.

१) समतल श्री
यंत्र
*
समतल श्री यन्त्र भोजपत्र के कागज के उपर या पतरे के उपर उपसाया हुआ होता है.

३)
कूमपृष्ठ श्री
यंत्र.
* पिरामिड का उत्कृष्ठ स्वरुप वह श्री यन्त्र है. कछुए के पीठ जैसे आकार का श्री यन्त्र कूर्मपृष्ठ श्री यन्त्र कहा जाता है.
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