
* For Free Astrology Consultation Please Like Our Official Page On Facebook .. & Tell Your Problem By Massage Or Write In Comment Box... (Thank you...)
** हमारे भारत देश मे दान धर्म को विशेष महत्व दीया गया है. परन्तु कइ बार एसा होता है की दान धर्म करने के पश्चात भी हमे लाभ की जगह पर सिर्फ़ हानि ही होती है. इसलिये हमे अपनी आय मे से दान देना चाहीये या नही इसका विचार भी जन्मकुन्डली से ही करना चाहीये. वर्षफ़ल की ग्रह चाल से भी कोइ दान मना हो तो दान करने पर हानि का कारण बनेगा, शुभ फ़ल नही होगा. यह हो सकता है की यह कुप्रभाव वर्ष विशेष में ही हो.
* लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार :
- उच्च ग्रह की वस्तुओ का दान न करे और निच ग्रह की वस्तुओ
का दान किसी से न ले. यदि ऐसा करेगे तो हानि होगी.
- चन्द्रमा छठे भाव मे हो तो पानी का दान या कुआ, तालाब, बावडी खुदवाना, नल लगवाना, प्याउ लगवाना, दुजो के आराम के लिये अपनी आय से धन
देना वंशहीन या सन्तानहीन होना पडे.
- शनि आठवे भाव मे हो तो सराय, होटल, या ऐसा मकान न बनाये जहा लोग मुफ़्त
आराम करे. ऐसा करगे
तो आर्थिक तंगी होगी और बेघर भी होना पड सकता है.
- शनि पहले भाव या गुरु पांचवे भाव मे हो तो भिखारी को तांबे का सिक्का दान
देना ठीक नही है. यदि ऐसा करेगे तो अशुभ समाचार मिलेगे और बच्चो की मृत्यु हो जाये.
- गुरु दसवे भाव मे हो और चन्द्रमा चौथे भाव मे हो तो धर्म स्थल बनवाना या धार्मिक कार्य
करने पर निर्दोश होने पर भी प्राण दन्ड या सजा मीले. शुक्र नौवे भाव मे हो तो लोगो को
मुफ़्त सहायता या अनाथ बच्चो की सहायता न करे. यदि करेगे तो निर्धन या कंगाल हो
जायेगे.
- चन्द्रमा बारवे भाव मे हो तो पंडित या धार्मिक प्रवचन या कथा
वाचक को भोजन कराना या मुफ़्त शिक्षा देने का प्रबन्ध करना अशुभ होगा एवं मृत्यु के
समय शान्ति नही मीलेगी. गुरु
सातवे भाव मे हो तो पुजारी को मुफ़्त कपडे ना दे. यदि देगे तो
निर्धनता और निसन्तान होने का व्यर्थ मे कारण
बनेगे.
- शनि छठे भाव मे अशुभ हो तो जब भतीजे या भतीजी का विवाह हो तो वे
निसन्तान, निर्धन, व दुखी होगे. यदि चाचा अपनी आय से उनका विवाह करे तो
फ़ल शुभ हो अशुभ समय मे शनि की वस्तुओ का दान सहायता देगा परन्तु दत्तक से दान
कराने पर अशुभ व हानि होगी.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
- Home
- Contact Us
- product-जीवन सार पत्रिका और ग्रहो के रत्न
- ग्रहो के रत्न और इनके लाभ
- लाल किताब के अनुसार सभी ग्रहों के सामान्य उपाय
- काल सर्प दोष के प्रकार इनका प्रभाव और उपाय
- मंगल दोष एवं मंगल दोष का परिहार और सामान्य उपाय
- पितृ दोष और पितृ दोष के उपाय
- लाल किताब के अनुसार संतान संबंधी उपाय
- शनि की साडेसाती एवं ढैया और उपाय
- चांडाल योग और इसके प्रकार
- रविवार व्रत विधि विधान
- सोमवार व्रत विधि विधान
- मंगलवार व्रत विधि विधान
- बुधवार व्रत विधि विधान
- गुरुवार व्रत विधि विधान
- शुक्रवार व्रत विधि विधान
- शनिवार व्रत विधि विधान
- लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार
- लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार
- दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम
- यन्त्र और मन्त्र शक्ति द्वारा वास्तुदोष निवारण
- श्री यन्त्र द्वारा वास्तुदोष निवारण
- पूर्व दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- पश्चिम दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- उत्तर दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- दक्षिण दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- इ॔शान दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- अग्नि दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण
- विझिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम
- वास्तुशास्त्र में विद्यार्थीओ के लिये मार्गदर्शन
- पूर्वाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- पश्चिमाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय
- होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- शनि जयंती पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- श्राद्ध का महत्व
- जन्माष्टमी पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- नवरात्रि व्रत विधि
- नवदुर्गा स्वरुप शैलपुत्री
- नवदुर्गा स्वरुप ब्रह्मचारिणी
- नवदुर्गा स्वरुप चंद्रघण्टा
- नवदुर्गा स्वरुप कूष्माण्डा
- नवदुर्गा स्वरुप स्कन्दमाता
- नवदुर्गा स्वरुप कात्यायनी
- नवदुर्गा स्वरुप कालरात्रि
- नवदुर्गा स्वरुप महागौरी
- नवदुर्गा स्वरुप सिद्धिदात्री