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 * जन्मकुंडली का अष्टम और नवम भाव नैऋत्य कोण का सूचक है. कालपुरुष के पैरो की दोनो एडीयो पर यह दिशा अमल करती है. इस दिशा के स्वामी राहु-केतु है. भद्रकाली और पितृओ का इस दिशा मे वास होता है.

> नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष :

- नैऋत्य कोण में खाली जगह हो, गड्डा हो या कांटेवाले वृक्ष हो तो घर में बीमारीया आती है और शत्रुओ से परेशानी होती रेहती है. आर्थिक संपन्नता आती नहि है.
- नैऋत्य कोण में शयनखंड हो, उसमे तेल का डीब्बा, चुल्हा आदि वस्तुए रखी हुयी हो तो दु:स्वप्न, व्याधि और व्यर्थ की चिंताये सताया करती है. शयनखंड में बैठ के नशा करना पारिवारिक हानि का सूचक है.
- नैऋत्य कोण में कुआँ हो या जलस्त्रोत हो तो गृहस्वामी को मानसिक तनाव का भोग बनना पडता है.
- नैऋत्य कोण में रसोई घर हो तो पति-पत्नि के बीच में रोज कलह होते रहेगे.
- नैऋत्य कोण में रहे हुये दोषो के कारण वायव्य कोण भी स्वत​: ही दू:षित हो जाता है.
- नैऋत्य कोण के दोष के कारण शत्रुभय एवं कोर्ट​-कचहरी संबंधी परेशानीया लगी रेहती है.


> नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :

- नैऋत्य कोण के मुख्यद्वार पर या पूजाखंड में राहु यन्त्र स्थापित करे.
- राहु दोष के कारण दु:स्वप्न आते हो तो उसकी शान्ति करवाये.
- नैऋत्य कोण में शयनखंड हो और इस कोण के दोष की वजह से परेशानीया होती हो तो पलंग के नीचे तांबे के पात्र में पानी रख के सोना चाहिये.
- बुधवार का व्रत करे.
- घर के मुख्यद्वार पर मिश्रित रंग के गणेश जी स्थापित करे.
- भारत में नैऋत्य की हवा बरसात लाती है. अत​: इस दिशा में मुख्य प्रवेशद्वार हो तो उसे बरसात का सीधा असर होता है और नुकशान होता है. जिस से रक्षा हेतु नैऋत्य दिशा बंध रखनी चाहिये उस तरफ़ की दिवार वजनदार और मोटी रखनी चाहिये जिस के कारण भेज से सुरक्षा मीलती है.


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