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* लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार :
- भवन शनि संबंधी वस्तु है. शनि ग्रह भवन या मकान बनवाने मे महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है. लाल किताब मे भवन संबंधी भी कइ शुभाशुभ स्तिथिओ का वर्णन कीया गया है, जिसमे से कुछ शुभाशुभ विचार निम्न प्रकार के है.
- यदि भवन मे वायु बहार से एकदम सीधी होकर आये तो बच्चो के लिये अशुभ है, कोइ न कोइ अचानक परेशानी आ सकती है. राहू-केतु का अशुभ प्रभाव प्रात: सायं हो. अंधा या विधुर वहा परेशान रहे. प्रयास करे भवन मे बिल्कुल सीधी हवा न आए.
- रात्री मे सोते समय पलंग का सिरहाना पूर्व मे रखे या दक्षिण मे रखे. ध्यान रखे पूर्व या दक्षिण की और पाँव करके सोना स्वास्थ्य के लिये शुभ नही है. उत्तर दिशा का यहाँ कोइ विचार नही है उत्तर दिशा मे चाहे जेसे कार्य करे शुभ ही है.
- भवन के अन्दर की सभी वस्तुएँ शुभ फ़ल देगी जब बैठक या बैठने का स्थान पूर्वी दीवार के मध्य मे हो.
- आग य अग्नि संबंधी सभी कार्य दक्षिण या दक्षिण-पूर्व ( आग्नेय कोण ) मे करे.
- धन-सम्पत्ति का स्थान दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम ( नैऋत्य कोण ) मे शुभ है.
- खाली स्थान, अतिथि के लिये कक्ष पश्चिम या उत्तर-पश्चिम ( वायव्य कोण ) मे शुभ है.
- भवन से बाहर निकलते समय जल दायी ओर तथा अग्नि बायी ओर या पीठ पीछे रहे तो ठीक है.
- भवन के समीप यदी पीपल का वृक्ष हो तो उसकी सेवा से शुभ फ़ल मीलेगा. यदी सेवा नही करेगे तो उसकी छाया जहाँ तक पडेगी वहाँ तक भवन मे अनिष्ठ ही होगा.
- भवन के पास कुआ है तो यदी उसमे श्रद्धा सहित थोडा दूध डालते रहेगे तो शुभ फ़ल मिलेगा वरना अनिष्ठ ही होगा.
- भवन मे कीकर का वृक्ष है तो निस्संतान बना देगा. इससे बचने के लिये ब्रह्ममुहूर्त के समय जब तारो की छाव हो तो ४० दिन तक प्रत्येक शनिवार उसकी जड मे पानी डाले.
- भूखंड के हर कोण या दिशा मे ग्रह विशेष का प्रभाव रहता है. उस दिशा या कोण मे उसके शत्रु ग्रहो की वस्तुओ की स्थापना नही करनी चाहीये.
- कब्रिस्तान या श्मशान के आसपास बनाया भवन निस्संतान या दत्तक सन्तान होने की निशानी है. उपाय यही है की पूर्व कोण मे ४०-४३ कदम के अन्दर कुआ बनाना शुभ है.
* भवन बनाने से पूर्व इन पर विचार कर के ही भवन बनाए जिससे आनेवाली अशुभता से बच सके.
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