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* मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय :

* भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायन यानि मकरसंक्रांति का महत्व जताते हुये गीता में कहा था की उत्तरायन के ६ मास के शुभ काल में जब सूर्य देवता उत्तरायन में होते है और पृथ्वी प्रकाशमय रेहती है. तब इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से जीव का पुनर्जन्म नही होता है और वह ब्रह्म को प्राप्त करता है. इससे बिलकुल विरुद्ध सूर्य दक्षिणायन होता है तब पृथ्वी अंधकारमय होती है और इस अंधकार में शरीर का त्याग करे तो उस जीव को पुनर्जन्म लेना पडता है. ( श्लोक २४-२५)
- महाभारत तथा भागवत पुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायन होने के दिन ही पितामह भीष्म ने अपना देह त्याग कीया था..
- विष्णु धर्मसूत्र अनुसार पितृओकी शांति के लिये तथा स्वास्थ्यवर्धन और कल्याण के लिये तिल का प्रयोग स्नान, दान, भोजन, जल अर्पण, आहुति तथा तिल के तेल से मालिश करने से पाप नष्ट होते है..
* मकर संक्रांति के दिन संक्रांति का स्नान और अर्ध्य का विशेष महत्व होता है. इसलीये इस दिन पवित्र नदीओ में स्नान करना चाहिये और अगर ऐसा नही कर पाते है तो घर पर ही ये विशेष उपाय करे.
* मकर संक्राति का विशेष उपाय :
- इस दिन स्नान करने के जल में तिल तथा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिये.
- स्नान करने के बाद एक तांबे के कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चंदन, तिल, चावल, और लाल फ़ूल डालकर " ॐ धृणि आदित्याय नम: " इस मंत्र का जाप करते हुये सूर्यनारायण को अर्ध्य प्रदान करे. तत पश्चात निम्न १२ मंत्रो का जप करते हुये सूर्य नारायण को प्रणाम करे.
१) ॐ सूर्याय नम:
२) ॐ भास्कराय नम:
३) ॐ रवये नम:
४) ॐ मित्राय नम:
५) ॐ भानवे नम:
६) ॐ खगाय नम:
७) ॐ पुष्णे नम:
८) ॐ मारिचाये नम:
९) ॐ आदित्याय नम:
१०) ॐ सावित्रे नम:
११) ॐ आर्काय नम:
१२) ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
- इस दिन तिल और गुड के बने लड्डू, खीचडी, और तांबे के पात्र का दान करना चाहिये.
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