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* गुरु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए और गुरु को बलि बनाने के लिए गुरुवार का व्रत करना बहोत फलदायक है. यह व्रत विध्या-बुद्धि प्रदाता तथा उत्तम स्थान पद प्रदायक, धन सम्पदा की स्थिरता हेतु एवं दाम्पत्य सौख्य, सन्तति सुख, यशव्रुद्धि सूचक भी है. इस व्रत को निम्न तरीके से पूर्ण श्रद्धा के साथ करे.
* गुरुवार व्रत विधि :
- गुरुवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से
प्रारंभ करे और ३ या १ वर्ष अथवा १६ संख्या के व्रत करने का विधान है.
- गुरुवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके पीले रंग का वश्त्र धारण करे एवं मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक करे. इस दिन केले के पेड़ के दर्शन करे एवं हल्दी-सरसो मिश्रित जल प्रदान करे. तथा
"ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे
नम" इस बिज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे. भोजन में चने की दाल , हलवा, केशरीया चावल आदि पदार्थ बनाये.
- भोजन से पूर्व भोजन का कुछ भाग गाय या विध्यार्थी को देकर
भोजन करे.
भोजन में प्रथम ७ ग्रास उपरोक्त
पदार्थ ग्रहण करे फिर अन्य पदार्थ ग्रहण करे.
- अंतिम गुरुवार को हवन
क्रिया के पश्चात बालक-विद्यार्थी को उपरोक्त
पदार्थ सहित भोजन कराकर दक्षिणा स्वरूप पीले वस्त्र, चने
की दाल , पीला चन्दन गट्टा आदि प्रदान करे.
* व्रत कब नष्ट नहीं होता है : व्रत के दिन जल, सभी प्रकार के फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ या औषध सेवन करने से व्रत नष्ट नहीं होता है.
* व्रत कब नष्ट होता है : व्रत के दिन एक बार भी पान खाने से, दिन के समय सोने से, स्त्री रति प्रसंग आदि से व्रत नष्ट होता है.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
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