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* आश्विन मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चलनेवाले व्रत को नवरात्रि केहते है.

 

* नवरात्रि व्रत विधि :

 

- प्रतिपदा यानी प्रथम दिन प्रात : स्नान आदि से निवृत होकर के संकल्प करे और मिट्टी की बेदी बनाकर उसमें गेहू या जौ बोए ! इस पर कलश की स्थापना करे..!
 
- कलश के उपर श्री दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन करते है और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या करवाये. ध्यान रहे कि नवरात्रि प्रारम्भ होने से लेकर समाप्ती तक देवी के समक्ष अखण्ड दीपक जलाए रखना चाहिये..! वैष्णवलोग राम की मूर्ति स्थापित कर रामायण का पाठ कर सकते है..!

 

विशेष : नवरात्रि के नौ दिन नवपारायण पाठ किया जाता है. प्रत्येक पारायण के पश्चात विश्राम होता है. इस प्रकार रामायण का पाठ नौ दिनो में पूर्ण होता है. इसी तरह नवरात्रि के नौ दिन हर रोज नवदुर्गा के भिन्न-भिन्न नौ रुपो का ध्यान एवं पूजन कीया जाता है.

 

* नवदुर्गा के नौ रुप ...

 

1. शैलपुत्री - नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। यह कल्याणी भी कही जाती है। इनकी उपासना से सुखी और निरोगी जीवन मिलता है।

2. ब्रह्मचारिणी - नवरात्रि के दूसरे दिन तपस्विनी रूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना से पुरूषार्थ, अध्यात्मिक सुख और मोक्ष देने वाली होती है। सरल शब्दों में प्रसन्नता, आनंद और सुख के लिए इस शक्ति की साधना का महत्व है।

3. चंद्रघंटा - नवरात्रि की तीसरे दिन नवदुर्गा के तीसरी शक्ति चंद्रघंटा को पूजा जाता है। इनकी भक्ति जीवन से सभी भय दूर करने वाली मानी गई है।

4. कूष्मांडा - नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना का महत्व है। यह उपासना भक्त के जीवन से कलह, शोक का अंत कर लंबी उम्र और सम्मान देने वाली होती है।

5. स्कंदमाता - नवरात्रि के पांचवे दिन स्कन्दमाता की पूजा की जाती है। माता की उपासना जीवन में प्रेम, स्नेह और शांति लाने वाली मानी गई है।

6. कात्यायनी - नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का महत्व है। माता की पूजा व्यावहारिक जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ तन और मन को ऊर्जा और बल देने वाली मानी गई है।

7. कालरात्रि - नवरात्रि के सातवें दिन दुर्गा के तामसी स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की जाती है, किंतु सांसारिक जीवों के लिये यह स्वरूप शुभ और काल से रक्षा करने वाला है। इनकी उपासना पराक्रम और विपरीत हालात में भी शक्ति देने वाला होता है।

8. महागौरी - नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। मां का यह करूणामयी रूप है। इनकी उपासना भक्त को अक्षय सुख देने वाली मानी गई है।

9. सिद्धिदात्री - नवरात्रि के अंतिम या नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना का महत्व है। इनकी उपासना समस्त सिद्धि देने वाली होती है। व्यावहारिक जीवन के नजरिए से ज्ञान, विद्या, कौशल, बल, विचार, बुद्धि में पारंगत होने के लिए माता सिद्धिदात्री की उपासना बहुत ही प्रभावी होती है।

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