
* For Free Astrology Consultation Please Like Our Official Page On Facebook .. & Tell Your Problem By Massage Or Write In Comment Box... (Thank you...)
* मानव जीवन का हर व्यवहार व्यापार और व्यवसाय के उपर निर्भर है, हम हमारे व्यापार या व्यवसाय मे काफ़ी महेनत करते है फ़िर भी इच्छित सफ़लता नहि मीलती इसका कारण दुकान या ओफ़िस का वास्तुदोष भी हो सकता है. अत: हमे हमारी दुकान या ओफ़िस मे भी वास्तुशास्त्र के नियमो का पालन करना चाहिए. दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम निम्न प्रकार के है.
१) दुकान या ओफ़िस के सामने कचरा
नही होना
चाहिए. अगर दुकान
या ओफ़िस
की लंबाइ
से दुगने
अंतर पर हो तो विघ्नरुप नही है.
२) दुकान या ओफ़िस पुर्वाभिमुख
हो तो बहोत लाभदायक
है, पश्चिमाभिमुख हो तो व्यवसाय
मे तेजी-मंदी आती रहेगी, उत्तराभिमुख हो तो धन-धान्य की वृद्धि होती
है, दक्षिणाभिमुख इच्छनीय
नही है.
३) दुकान या ओफ़िस का मुख्य द्वार
उतर-पुर्व ( इशान) अथवा अग्नि
तरफ़ के मुख का रखे.
४) केश बोक्स
उतर दिशा
मे खुले
इस तरह रखे.
५) जिस व्यापार
मे भठ्ठी
का काम पडता हो तो भठ्ठी
अग्नि कोण मे रखे.
६) शो रुम-शो केसीस
और प्रदर्शित
करने की वस्तुए दक्षिण
अथवा पश्चिम
तरफ़ की दिवार पर रखे.
७) इलेक्ट्रिक सामान
या स्विच
बोर्ड आदि अग्नि कोण मे रखे.
८) दुकान या ओफ़िस का इशान कोण खाली रखे वहा भारी
वस्तुए ना रखे.
९) जन्मकुंडली मे राहू-शुक्र बलवान
हो तो दक्षिणाभिमुख दुकान या ओफ़िस भी लाभदायी है.
१०)
दुकान या ओफ़िस के मालिक को हंमेशा पुर्वाभिमुख
होकर ही बैठना चाहिए.
मालिक काउन्टर
पर बैठते
हो तो खुद की दाहिनी तरफ़ उतर दिशा
मे केश बोक्स खुले
इस तरह केश बोक्स
रखे.
११)
दुकान या ओफ़िस त्रिकोणाकार
या टेडी-मेडी नही होनी चाहिये
ऐसी जगह पर व्यापार
करने से अशांति बनी रहेगी.
१२)
दुकान या ओफ़िस पर दरवाजे के नीचे कोइ अवरोध नही होना चाहीये. आनेवाले
ग्राहको को ठोकर लगे ऐसा कोइ भी अवरोध
ना हो.
१३) केश बुक,
पासबुक, हिसाबी दस्तावेज
या केश बोक्स जहा रखने मे आते उस तिजोरी को पवित्र रखे,
उसके उपर स्वस्तिक आदि शुभ चिन्ह
रखे. उसमे ५ हल्दि गांठ,
५ कमल काकडी, और श्री
यंत्र स्थापित
करे जिससे
व्यापार दीर्घकाल
तक चलता
रहे.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
- Home
- Contact Us
- product-जीवन सार पत्रिका और ग्रहो के रत्न
- ग्रहो के रत्न और इनके लाभ
- लाल किताब के अनुसार सभी ग्रहों के सामान्य उपाय
- काल सर्प दोष के प्रकार इनका प्रभाव और उपाय
- मंगल दोष एवं मंगल दोष का परिहार और सामान्य उपाय
- पितृ दोष और पितृ दोष के उपाय
- लाल किताब के अनुसार संतान संबंधी उपाय
- शनि की साडेसाती एवं ढैया और उपाय
- चांडाल योग और इसके प्रकार
- रविवार व्रत विधि विधान
- सोमवार व्रत विधि विधान
- मंगलवार व्रत विधि विधान
- बुधवार व्रत विधि विधान
- गुरुवार व्रत विधि विधान
- शुक्रवार व्रत विधि विधान
- शनिवार व्रत विधि विधान
- लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार
- लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार
- दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम
- यन्त्र और मन्त्र शक्ति द्वारा वास्तुदोष निवारण
- श्री यन्त्र द्वारा वास्तुदोष निवारण
- पूर्व दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- पश्चिम दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- उत्तर दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- दक्षिण दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- इ॔शान दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- अग्नि दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण
- विझिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम
- वास्तुशास्त्र में विद्यार्थीओ के लिये मार्गदर्शन
- पूर्वाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- पश्चिमाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय
- होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- शनि जयंती पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- श्राद्ध का महत्व
- जन्माष्टमी पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- नवरात्रि व्रत विधि
- नवदुर्गा स्वरुप शैलपुत्री
- नवदुर्गा स्वरुप ब्रह्मचारिणी
- नवदुर्गा स्वरुप चंद्रघण्टा
- नवदुर्गा स्वरुप कूष्माण्डा
- नवदुर्गा स्वरुप स्कन्दमाता
- नवदुर्गा स्वरुप कात्यायनी
- नवदुर्गा स्वरुप कालरात्रि
- नवदुर्गा स्वरुप महागौरी
- नवदुर्गा स्वरुप सिद्धिदात्री