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* भाद्रपद की शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष रेहता है. इस श्राद्ध पक्ष में जिस तिथी में घर में किसी की मृत्यु हो गयी हो तो श्राद्ध कर के ऋण उतारे. इस श्राद्ध की समयाविधि में सूई, सिलाई तथा कोई पवित्र कार्य-मूहुर्त न निकाले..
- पितृओ की मृत्यु तिथी के दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण और ब्राह्मण को भोजन कराना ही श्राद्ध है.
* तर्पण :
-पान, सुपारी, काले तिल, जौ, गेहू, चंदन, जनेऊ, तुलसी, पुष्प, दूब, कच्चा दूध, पानी, आदि सामग्री पूजा हेतु एकत्रित कर लेनी चाहिये. पूजा का स्थान गाय के गोबर से साफ़ कर लेना चाहिये. मृत पितृ के निमित्त और उनकी तिथी का स्मरण करके नैवेध निकाल लेना चाहिये.
* श्राद्ध संकल्प :
- आज मिति_______वार_____ मासे (कृष्ण या शुक्ल) पक्षे संयुक्त संवत्सरे ________ मम (पितृ/मातृ या दादा/दादी) की पुण्य श्राद्ध तिथी पर उनके ब्रह्मलोक में स्वर्ग में आनन्द एवं सुख की प्राप्ति हेतू उनकी भूख-प्यास का दोष शान्त हो तथा उन्हे आनन्द की प्राप्ति होवे. हमारे वंश व धन की वृद्धि होवे.
( ऐसा बोलते हुये हाथ में जल, जौ, तिल और दक्षिणा रखते हुये पांचो ग्रास पर घुमाकर दक्षिण दिशा की तरफ़ घुमाते हुये छोड दे.
इसके अतिरिक्त ब्राह्मण भोजन को निमित्त जो थाली में प्रसाद रखा हो उस पर घुमाकर जल छोडे और कहे इससे हमारे पूर्वज की तृप्ति होवे,
प्रसन्नता होवे...)
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