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* पश्चिम दिशा कालपुरुष के पेट​, और प्रजनन अवयव पर अमल करती है. इस दिशा में शनिदेव का आधिपत्य है.

पश्चिम दिशा के वास्तुदोष :

- यदि घर के पश्चिम तरफ़ दरार हो , पश्चिमाभिमुख मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हो तो घर में रोग और बीमारी का वातावरण रेहता है. आर्थिक स्थिति भी निर्बल रेहती है.
- पश्चिम दिशा में बाथरुम होना शुभ नहि है. पति-पत्नी के बीच कायमी टकराव रेहता है.
- पश्चिम भाग का कक्ष ब्रह्मस्थान से नीचा हो तो अपशय मीलता है. और बारंबार आर्थिक नुकशान होने के पसंग बनते रेहते है.
- पश्चिम भाग में पानी के निकास की व्यवस्था की हो तो भवन के स्वामी को कोइ लंबी बीमारी या रोग रेहता है.

 

पश्चिम दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :

- पश्चिम दिशा के दोष से सुरक्षा हेतु घर में वरुण यन्त्र स्थापित करे.
- पश्चिम भाग तरफ़ शनि यन्त्र स्थापित करे. शनि स्त्रोत का पाठ करे.
- भवन के स्वामी को हर शनिवार काले उडद और सरसो के तेल का दान करना चाहिये.
- जन्मकुंडली का सप्तम भाव कालपुरुष के पश्चिम भाग का सूचन करता है. जिससे शरीर के पेट​, और गुप्तांग पर उसका अमल होता है. जिस का कारक शनि है. अत​: पश्चिम भाग के दोष उस अवयव को निर्बल करते है. शनिवार का व्रत करने से इस दोष का निवारण हो सकता है. हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करे.


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