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* नवरात्री के दूसरे दिन नवदुर्गा के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी की पूजा आराधना होती है.

* पौराणिक कथानुसार अपने पूर्व जन्म में मां ब्रह्मचारिणी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवर्षि नारद के उपदेश से कठिन तपस्या की थी. इन्होने इस तपस्या के दौरान एक हज़ार वर्ष तक केवल फल खाकर व्यतीत किए और सौ वर्ष तक केवल शाक पर निर्भर रहीं.

- अपने कठिन उपवास के समय मां केवल जमीन पर टूट कर गिरे बेलपत्रों को खाकर तीन हज़ार वर्ष तक भगवान शिव की अराधना करती रही और फिर कई हज़ार वर्षों तक वह निर्जल और निराहार ही व्रत करती रही, तब जाकर भगवान भोलेनाथ इन्हें पति रूप में प्राप्त हुए थे.

- माता तपस्या का आचरण करने वाली हैं, जिस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है.

 

- माता ब्रह्मचारिणी का स्वरुप बहुत ही सात्विक और भव्य है. ये श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या रूप में हैं जिनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है. नवरात्री के दूसरे दिन साधक अपने मन को मां ब्रह्मचारिणी के चरणों में लगाते हैं और कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए साधना करते हैं. मां दुर्गा की नव शक्ति का यह दूसरा रूप भक्तों और साधकों को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाला है. इनकी उपासना करने से उपासक के मन में सदाचार, तप, वैराग्य और संयम की भावना जागृत होती है.
 

* ब्रह्मचारिणी स्वरुप का ध्यान एवं पूजन :

 

- इस मंत्र से माता का ध्यान करे.

 

" दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु |

देवी प्रसीदतु मणि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || "

 

- इस मंत्र से माता का पूजन करे.

 

" भूर्भुव: स्व: ब्रह्मचारिणी इहागच्छ इहतिष्ठ ब्रह्मचारिण्यै नम : !

ब्रह्मचारिणीमावाह्यामि स्थापयामि नम: ! पाद्यादि पूजनम विधाय !! "

 

" त्रिपुरां त्रिगुणाधारां मार्गग्यान स्वरुपिणिम !

त्रैलोक्यं वंदिता देवीं त्रिमूर्ति पूज्याम्यहम !! "

 

* नवरात्री के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा होती है. इस रूप में देवी को समस्त विद्याओं का ज्ञाता माना गया है अत: जो भी विद्यार्थी चाहते है की उनकी बुद्धि का विकास हो और पढाई में उन्हे सफ़लता मिले ऐसे व्यक्ति देवी के इस रुप की आराधना करे साथ ही जो उपाय दे रहे है उसे पूर्ण श्रद्धा के साथ करे.

 

* बुद्धि विकास एवं विद्या प्राप्ति के लिये विशेष उपाय :

 

- अपने सिर से पैर तक एक धागा नाप कर तोड़ लें, उसमे " या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: !! " पढ़ते हुए ५४ गांठे लगाइए, इसे माता को समर्पित कर के नवरात्री भर इस धागे का जप करे. नवमी के दिन धागा जल में प्रवाहित कर दे.
 

विशेष : यह उपाय माता-पिता अपने बच्चो के लिये भी कर सकते है..!!
* माता रानी सब का कल्याण करे और सभी को सुख एवं समृद्धि प्रदान करे इसी शुभकामना के साथ गुरुकृपा ज्योतिष की तरफ़ से सभी माता के भक्तो को जय माता दी....!

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