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 * जन्मकुंडली के दसम स्थान पर कालपुरुष की छाती, किडनी, दाह्या फ़ेफ़सा आदि अंग अमल करते है. दसम स्थान से दक्षिण दिशा निश्चित होती है. इस दिशा के स्वामी मृत्यु के कारक एसे यमराजा है.

> दक्षिण दिशा के वास्तुदोष :

- दक्षिण दिशा में पूजागृह होगा तो उसमें ऐश्वरीय वातावरण का निर्माण नही हो शकेगा.
- दक्षिण दिशा में शयनखंड हो तो उसमें अच्छी निंद्रा नही मील पायेगी.
- घर के दक्षिण भाग में अध्ययनखंड हो तो उसमें एकाग्रता नही मीलेगी.
- दक्षिण दिशा में भवन का द्वार हो और द्वार के सामने खड्डा, मैदान, या अंधकारमय वातावरण हो तो गृह स्वामी के भाइयो के लीये कष्टदायक होगा.
- दक्षिण दिशा के द्वार के सामने कुँआ हो, दिवार तुटी हुइँ हो, कचरापेटी या व्यर्थ की वस्तुएँ रखी हुइँ हो तो गृह सुख नही मीलेगा. दुर्घटना होने का डर रेहता है .
- दक्षिण दिशा का द्वार यम -राक्षस द्वार केहलाता है. यदि ऐसा द्वार नैऋत्य मुखी हो तो आकस्मिक और लंबे समय की बीमारी हो सकती है.
- दक्षिण दिशा का द्वार अग्निमुखी हो तो चोरी और आग का डर रेहता है.
- दक्षिण दिशा में बाल्कनी हो तो वह भी प्रगति के लीये बाधा उत्पन्न करता है.
- दक्षिण दिशा में अधिक खाली स्थान रखने से बिना वजह झगडे और गृहक्लेश होने की संभावना रेहती है.
- विश्वकर्माप्रकाश में वर्णन है की जिस तरह अमावस्या के दिन जन्मी हुइँ कन्या और पितृनाशक योग में जन्मा हुआ पुत्र व्यर्थ होता है. उसी तरह ऐश्वर्य प्राप्त करने के अभिलाषी व्यक्ति को दक्षिण दिशा के गृह का त्याग करना चाहिये.
- जिस तरह लालाश पडते बालोवाली, लंबे होठवाली, पीले नयनोवाली कन्या पति के लीये भाररुप होती है उसी तरह दक्षिण दिशा के घर से कौटुंबिक सुख नष्ट हो जाता है.
- जिस तरह आलस्य से शरीर​, कुपुत्र से कुल और दरिद्रता से जीवन नष्ट हो जाता है उसी तरह दक्षिण दिशा के घर से सब कुछ नष्ट हो जाता है. इस तरह दक्षिणाभिमुखवाला द्वार सुखदायक नही माना जाता है.
 

दक्षिण दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :

- दक्षिण दिशा दूषित हो तो दक्षिण द्वार पर "मंगल यन्त्र​" स्थापित करे.
- घर की अंदर और बाहर की तरफ़ गणेश मूर्ति स्थापित करे.
- घर के द्वार पर मंगलकारी चिन्ह लगाये.
- भवन के स्वामी को मंगलवार का व्रत करना चाहिये या भैरो की उपासना करनी चाहिये.
- हररोज हनुमान चालीसा का पाठ करे.
- जैन धर्म के लोगो को प्रवेशद्वार पर घंटाकर्ण महादेव का फ़ोटो लगाना चाहिये.
- दक्षिण भाग सीडी, ओवरहेड टंकी आदि से वजनदार बनाये.


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