
* For Free Astrology Consultation Please Like Our Official Page On Facebook .. & Tell Your Problem By Massage Or Write In Comment Box... (Thank you...)
* नवरात्री के तीसरे दिन नवदुर्गा के तीसरे स्वरुप चंद्रघण्टा की पूजा आराधना होती है.

* मां दुर्गा की नव शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्री के तीसरे दिन की जाती है. माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है, जिस कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है. इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है. इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो की विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं. सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि से असुर और राक्षस भयभीत करते हैं.
- मनुष्य को निरंतर माता चंद्रघंटा के पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयास करना चाहिए और इस दिन महिलाओं को घर पर बुलाकर आदर सम्मान पूर्वक उन्हें भोजन कराना चाहिए और कलश या मंदिर की घंटी उन्हें भेंट स्वरुप प्रदान करना चाहिए. इससे भक्त पर सदा भगवती की कृपा दृष्टि बनी रहती है.
* भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से उपासक आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है और जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है.
- माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना भक्तो को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त कर इसलोक और परलोक में कल्याण प्रदान करती है और भगवती अपने दोनों हाथो से साधकों को चिरायु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती हैं.
* चंद्रघंटा स्वरुप का ध्यान एवं पूजन :
- इस मंत्र से माता का ध्यान करे.
" पिण्डज प्रवरारुढा चंड कोपास्त्र कैर्युता !
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता !! "
- इस मंत्र से माता का पूजन करे.
" ॐ भूर्भुव: स्व: चन्द्रघण्टा इहागच्छ इहतिष्ठ चन्द्रघण्टाये नम : !
चन्द्रघण्टामावाह्यामी स्थापयामि नम : ! पाद्यादि पूजनम विधाय !! "
" ॐ कालीकां तु कलातीतां क्ल्याण ह्रदयां शिवाम !
कल्याण जननी नित्य कल्याणीं पूज्याम्यहम !! "
* माता रानी सब का कल्याण करे और सभी को सुख एवं समृद्धि प्रदान करे इसी शुभकामना के साथ गुरुकृपा ज्योतिष की तरफ़ से सभी माता के भक्तो को जय माता दी....!
- Home
- Contact Us
- product-जीवन सार पत्रिका और ग्रहो के रत्न
- ग्रहो के रत्न और इनके लाभ
- लाल किताब के अनुसार सभी ग्रहों के सामान्य उपाय
- काल सर्प दोष के प्रकार इनका प्रभाव और उपाय
- मंगल दोष एवं मंगल दोष का परिहार और सामान्य उपाय
- पितृ दोष और पितृ दोष के उपाय
- लाल किताब के अनुसार संतान संबंधी उपाय
- शनि की साडेसाती एवं ढैया और उपाय
- चांडाल योग और इसके प्रकार
- रविवार व्रत विधि विधान
- सोमवार व्रत विधि विधान
- मंगलवार व्रत विधि विधान
- बुधवार व्रत विधि विधान
- गुरुवार व्रत विधि विधान
- शुक्रवार व्रत विधि विधान
- शनिवार व्रत विधि विधान
- लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार
- लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार
- दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम
- यन्त्र और मन्त्र शक्ति द्वारा वास्तुदोष निवारण
- श्री यन्त्र द्वारा वास्तुदोष निवारण
- पूर्व दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- पश्चिम दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- उत्तर दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- दक्षिण दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- इ॔शान दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- अग्नि दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण
- विझिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम
- वास्तुशास्त्र में विद्यार्थीओ के लिये मार्गदर्शन
- पूर्वाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- पश्चिमाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय
- होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- शनि जयंती पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- श्राद्ध का महत्व
- जन्माष्टमी पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- नवरात्रि व्रत विधि
- नवदुर्गा स्वरुप शैलपुत्री
- नवदुर्गा स्वरुप ब्रह्मचारिणी
- नवदुर्गा स्वरुप चंद्रघण्टा
- नवदुर्गा स्वरुप कूष्माण्डा
- नवदुर्गा स्वरुप स्कन्दमाता
- नवदुर्गा स्वरुप कात्यायनी
- नवदुर्गा स्वरुप कालरात्रि
- नवदुर्गा स्वरुप महागौरी
- नवदुर्गा स्वरुप सिद्धिदात्री