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* वायव्य दिशा कालपुरुष के हाथ की कोहनी और घूटने पर अमल करती है. तथा जन्मकुंडली के पंचम और षष्ठ भाव से वायव्य दिशा प्रभावित होती है. अत: वायव्य दिशा का वास्तुदोष मानव शरीर के इन अंगो पर असर करता है. चन्द्र इस दिशा का ध्योतक ग्रह है.
> वायव्य दिशा के वास्तुदोष :
- वायव्य कोण खाली हो तो ऐसे भवन में वास कर के आनंद प्राप्त नही कर सकते.
- वायव्य कोण में शयनखंड हो तो ऐसे मकान में रेहनेवाले को शर्दी, खांसी और कफ़ की समस्या रेहती है.
ऐसे इन्सान कर्जदार बनते जाते है.
- वायव्य कोण में अध्ययनखंड हो तो परिवार के बच्चो का मन अभ्यास में स्थिर नही रेहता.
- वायव्य कोण में रसोइँघर रखने से स्त्री की चंचल प्रवृति में बढोतरी होती है.
- वायव्य कोण में शौचालय रखने से परिवार में सुख-शांति का अभाव रेहता है.
- वायव्य कोण में चूला हो तो घर में महेमानो का आना-जाना लगा रेहता है और महेमानो को भोजन कराने में ही गृहिणी का ज्यादातर समय व्यतित होता है.
> वायव्य दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष निवारण के लीये घर में चन्द्र यन्त्र रखे.
- घर के मुख्यद्वार के उपर अंदर और बहार की तरफ़ श्वेत (सफ़ेद) गणेशजी की मूर्ति स्थापित करे.
- घर की दिवार पर क्रिम या सफ़ेद रंग कराये.
- स्फ़टिक के गणेशजी या स्फ़टिक के श्री यन्त्र की हररोज पूजा करे.
- स्फ़टिक की माला से मन्त्रजाप करे.
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