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* ज्योतिषशाश्त्र के अनुसार जिस किसी की भी कुंडली में भाग्य के भाव में सूर्य और राहू की युति होती है तो उसे पितृ दोष कहा जाता है, साथ ही इसे सूर्य ग्रहण योग भी कहा जाता है. अत: सूर्य और राहू की युति किसी भी भाव में हो तो यह युति उस भाव के फल को नष्ट कर देती है. ऐसे सूर्य में प्रकाश तो होता है पर ताप नहीं होता.
* पितृ दोष के कारण:
ज्योतिषशाश्त्र के
अनुसार नीचे बताई गयी स्थितियों के कारण कुंडली में पितृ दोष बनता है.
१) परिवार में
किसी की अकाल मृत्यु हुयी हो और ऐसी घटनाये बार बार बनी हो तो,
२) पितृओ का विधि
विधान से श्राद्ध न किया जाता हो तो,
३) घर के किसी भी
सदस्य द्वारा भ्रूण हत्या या गौ हत्या हुयी हो तो,
४) धर्मं प्रसंगों
में पितृओ को याद न किया जाता हो तो,
६) परिवार में
धर्मं का आचरण न होता हो तो,
ऐसे कई कारण
है जिनकी वजह से कुंडली में पितृदोष बनता है.
* पितृ दोष के उपाय :
१) श्राद्ध पक्ष में पूर्वजो को
मृत्यु तिथि के अनुसार पूजन, पिण्ड दान, तर्पण आदि के साथ ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, दक्षिणा आदि का दान करे.
२) हर अमावस को
कंडे का धुप कर के उसमे खीर का भोग लगाकर दक्षिण दिशा की ओर पितृओ का आव्हान कर के
उनसे क्षमा याचना करे.
३) हर रोज सुबह-शाम
पनिहारी पर घी का दीपक करे.
४) पीपल के
वृक्ष को ताम्बे के कलश से जल दे.
५) नीले रंग के
कपडे में ४०० ग्राम जौ या सरसों रखकर शनिवार के दिन नदी में प्रवाहित करने से राहू
का कुप्रभाव कम होगा.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
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