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 * अग्नि कोण कालपुरुष की दाह्यी भूजा, दाह्ये घूटने, दाह्यी आंख और जन्मकुंडली के एकादश एवं द्वादश भाव पर अमल करता है. अत​: अग्नि कोण का वास्तुदोष शरीर के इन अंगो पर असर करता है. शुक्र का इस कोण पर प्राधान्य है.


> अग्नि दिशा के वास्तुदोष :

- अग्नि कोण में रसोइँघर के पास कुआँ हो तो घर में सास​-बहु के बीच में कटुता रेहती है.
-  रसोइँघर अव्यवस्तिथ हो और अग्नि कोण भी गंदकी भरा हो तो ऐसे घर की गृहिणी का जीवन संघर्षमय रेहता है.
- अग्नि कोण की पूर्व तरफ़ का मार्ग सीधा उत्तर तरफ़ आगे जाने के बजाय घर के पास ही पुरा हो जाता हो तो घर के मालिक का हस्तांतर हो जाता है.
- अग्नि कोण पूर्व की तरफ़ आगे बढा हुआ हो तो घर और परीवार के लीये विनाशकारी बनता है.
- अग्नि कोण में कूआँ या अन्य कोइँ जलस्त्रोत होना ही नही चाहिये.
- अग्नि कोण उँचा हो और नैऋत्य कोण नीचा हो तो अपकीर्ति और संतति को कष्ट होगा.


> अग्नि दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :

- घर के मुख्यद्वार के उपरवाले भाग में अंदर और बाहर की तरफ़ हरे रंग की गणेश मूर्ति की स्थापना करे.
- घर के प्रवेशद्वार पर सूर्य की प्रतिकृति लगाये.
- गणेशजी की उपासना करे, संकट चतुर्थी का व्रत करे.
- रसोइँ अग्नि कोण में रखे.
- अग्नि कोण का ध्योतक ग्रह शुक्र है. अत: शुक्रवार का व्रत करे. श्री सुक्तम और श्री यंत्र की पाठ-पूजा करे
- इस कोण में तुलसी का कुंड रखे. इस कोण में संध्या समय दीप-धूप करे.


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