
* For Free Astrology Consultation Please Like Our Official Page On Facebook .. & Tell Your Problem By Massage Or Write In Comment Box... (Thank you...)
* प्राचीन ज्योतिष में शनि की बुरी चाल से ३ बड़े चक्कर को साडेसाती कहा जाता है और इस से अलग अढाई वर्ष का ढैया कहा जाता है. शनि लग्न से चतुर्थ या अष्टम भाव में हो तो ढैया होता है एवं द्वादश, लग्न और द्वितीय भाव में शनि आये तो उसे साडेसाती कहा जाता है.
* शनि साडेसाती के बुरे परिणाम:
१) सांप का डसना.
२) शराब आदि का व्यसनी होना.
३) मकान का बिक जाना या गिर जाना.
४) घर में चोरी होना.
५) पुलिश स्टेशन एवं कोर्ट के चक्कर खाना.
६) वाहन गुम या चोरी हो जाना एवं वाहन का दुर्घटनाग्रस्त हो जाना.
७) चाचा को मृत्यु तुल्य कष्ट होना या मृत्यु होना.
८) फैक्ट्री या मशीनों का बिक जाना या रुक जाना या बंद हो जाना.
शनि साडेसाती और ढैया का उपाय :
ढैया :
१) चतुर्थ भाव में शनि हो तो किसी भी एक शनिवार को ४ बोतल शराब नदी में प्रवाहित करे.
२) अष्टम भाव में शनि हो तो किसी भी एक शनिवार को ८ किलो साबुत उड़द नदी में प्रवाहित करे.
साडेसाती :
१) द्वादश भाव में शनि हो तो शराब व मांस का सेवन न करे.
२) लग्न में शनि हो तो किसी भी एक शनिवार को ५० ग्राम सुरमा जमीन में दबाये. बन्दर को गुड दे.
३) द्वितीय भाव में शनि हो तो नंगे पैर मंदिर में दर्शन हेतु जाये.
इस से अलग आम उपाय भी है :
१) सांप को दूध
पिलाए.
२) तेल का दान
करे.
३) लोहे का
सामान, चिमटा,
तवा, अंगीठी ( रोटी पकाने का सामान ) आदि का दान करे.
४) लोहे का
छल्ला दाये हाँथ की मध्यमा उंगली में धारण करे.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
- Home
- Contact Us
- product-जीवन सार पत्रिका और ग्रहो के रत्न
- ग्रहो के रत्न और इनके लाभ
- लाल किताब के अनुसार सभी ग्रहों के सामान्य उपाय
- काल सर्प दोष के प्रकार इनका प्रभाव और उपाय
- मंगल दोष एवं मंगल दोष का परिहार और सामान्य उपाय
- पितृ दोष और पितृ दोष के उपाय
- लाल किताब के अनुसार संतान संबंधी उपाय
- शनि की साडेसाती एवं ढैया और उपाय
- चांडाल योग और इसके प्रकार
- रविवार व्रत विधि विधान
- सोमवार व्रत विधि विधान
- मंगलवार व्रत विधि विधान
- बुधवार व्रत विधि विधान
- गुरुवार व्रत विधि विधान
- शुक्रवार व्रत विधि विधान
- शनिवार व्रत विधि विधान
- लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार
- लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार
- दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम
- यन्त्र और मन्त्र शक्ति द्वारा वास्तुदोष निवारण
- श्री यन्त्र द्वारा वास्तुदोष निवारण
- पूर्व दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- पश्चिम दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- उत्तर दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- दक्षिण दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- इ॔शान दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- अग्नि दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण
- विझिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम
- वास्तुशास्त्र में विद्यार्थीओ के लिये मार्गदर्शन
- पूर्वाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- पश्चिमाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय
- होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- शनि जयंती पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- श्राद्ध का महत्व
- जन्माष्टमी पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- नवरात्रि व्रत विधि
- नवदुर्गा स्वरुप शैलपुत्री
- नवदुर्गा स्वरुप ब्रह्मचारिणी
- नवदुर्गा स्वरुप चंद्रघण्टा
- नवदुर्गा स्वरुप कूष्माण्डा
- नवदुर्गा स्वरुप स्कन्दमाता
- नवदुर्गा स्वरुप कात्यायनी
- नवदुर्गा स्वरुप कालरात्रि
- नवदुर्गा स्वरुप महागौरी
- नवदुर्गा स्वरुप सिद्धिदात्री