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* शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए और शनि को बलि बनाने के लिए शनिवार का व्रत करना बहोत फलदायक है. यह व्रत विविध सांसारीक विकार-विबाधा-अनिष्ट एवं शत्रु विनाशक है. इस व्रत को निम्न तरीके से पूर्ण श्रद्धा के साथ करे.


* शनिवार व्रत विधि :

- शनिवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से प्रारंभ करे और १९, ३१ या ४१ शनिवार तक करे
- शनिवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके काले रंग की बनियान धारण करे और सरसो के तेल का दान करे तथा तांबे के कलश मे जल, थोडे काले तिल​, लोंग​, दुध, शक्कर, आदि डाल के पीपल अथवा खेजडी के वृक्ष के दर्शन करते हुये पश्चिम दिशा कि तरफ़ मुख रखते हुये जल प्रदान करे. तथा "ॐ प्रां प्रीं प्रों स​: शनये नम​:" इस बिज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे.
- इस दिन भोजन में उडद दाल एवं केले और तेल के पदार्थ बनाये. भोजन से पुर्व भोजन का कुछ भाग काले कूत्ते या भिखारी को दे उसके बाद प्रथम ५-७ ग्रास उपरोक्त पदार्थ  ग्रहण करे बाद में अन्य पदार्थ ग्रहण करे
- अंतिम शनिवार को हवन क्रिया के पश्चात यथाशक्ति तील, छ्त्री, जुता, कम्बल​, नीला-काला वस्त्र​, आदि वस्तुओ का दान निर्धन व्यक्ति को करे.


* व्रत कब नष्ट नहीं होता है : व्रत के दिन जल, सभी प्रकार के फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ या औषध सेवन करने से व्रत नष्ट नहीं होता है.


* व्रत कब नष्ट होता है : व्रत के दिन एक बार भी पान खाने से, दिन के समय सोने से, स्त्री रति प्रसंग आदि से व्रत नष्ट होता है.


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