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* आज कल कई लोग मंगल दोष की वजह से मांगलिक अवसरों को खो देते है. परन्तु कई योग ऐसे है जिनकी वजह से मंगल या मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है. अत: मंगल दोष के नाम पर मांगलिक अवसरों को खोना नहीं चाहिए. 

> मंगल दोष का परिहार :

निचे बताये गए योग कुंडली में हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है.

१) यदि मंगल स्वराशी, मूल त्रिकोण राशि, या अपनी उच्च राशि में स्थित हो.


२) मेष या वृश्चिक का मंगल चतुर्थ भाव में, कर्क या मकर का मंगल सप्तम भाव में, मीन का मंगल अष्टम भाव में तथा मेष या कर्क का मंगल द्वादश भाव में हो.


३) यदि गुरु या शुक्र बलवान, उच्च के होकर सप्तम भाव में हो तथा मंगल निर्बल या नीच राशिगत हो.


४) यदि मंगल शुक्र की राशि में स्तिथ हो तथा सप्तमेश बलवान होकर केंद्र त्रिकोण में हो.


५) यदि मंगल गृह वाले भाव का स्वामी बली हो, उसी भाव में स्तिथ हो या द्रष्टि रखता हो, साथ ही सप्तमेश या शुक्र अशुभ भावो में न हो.


६) यदि वर और कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में मंगल दोष हो तथा पर कुंडली में कोई भी पाप गृह स्तिथ हो.

* लाल किताब के अनुसार मांगलिक या मंगल दोष के सामान्य उपाय :

१) हनुमानजी का पाठ करे.

२) हनुमानजी को मीठा प्रशाद चढ़ाये और सब को बांटे.
३) हनुमानजी को मंगलवार के दिन सिन्दूर का चोला चढ़ाये.
४) अपने पास लाल रंग का रुमाल रखे.
५) बिना जोड़ का चांदी का छल्ला पहने.
६) ताम्बे या सोने की अंगूठी में मूंगा जडवा कर पहने.
७) चांदी के कड़े में ताम्बे की मेख जडवा कर पहने.
८) बंदरो को भोजन दे.
९) तंदूर पर मीठी रोटी लगवा कर कुत्तो को दे.
१०) मंदिर में मीठा भोजन बांटे.
११) चीनी बहते पानी में प्रवाहित करे.
१२) शहद  या सिन्दूर बहते पानी में प्रवाहित करे.

email : gurukrupajyotish@yahoo.in


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