
* For Free Astrology Consultation Please Like Our Official Page On Facebook .. & Tell Your Problem By Massage Or Write In Comment Box... (Thank you...)

* काल सर्प दोष के प्रकार, इनका प्रभाव और लाल किताब के अनुसार कालसर्प योग के उपाय :
* काल सर्प दोष १२ प्रकार के होते है जिनका प्रभाव भी अलग अलग होता है.
१) अनन्त कालसर्प योग :
इस योग से प्रभावित होने पर व्यक्ति को शारीरिक और, मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. और सरकारी व अदालती मामलों में उलझना पड़ता है. साथ ही इस योग से प्रभावित व्यक्ति साहसी, निडर, स्वतंत्र विचारों वाला और स्वाभिमानी होता है.
उपाय: अपने पास चांदी की ठोस गोली रखे.
२) कुलिक काल सर्प योग :
इस कालसर्प योग से पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक कष्ट का सामना करना पड़ता है. साथ ही पारिवारिक स्थिति भी संघर्षमय और कलह पूर्ण होती है. सामाजिक तौर पर भी ऐसे व्यक्ति की स्थिति अच्छी नहीं रहती.
उपाय: दो रंग का कम्बल दान करे.
३) वासुकि कालसर्प योग :
इस कालसर्प योग से प्रभावित व्यक्ति का जीवन संघर्षमय रहता है और नौकरी एवं व्यवसाय में भी परेशानी बनी रहती है. इन्हें भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है व परिजनों एवं मित्रों से धोखा मिलने की संभावना रहती है.
उपाय: चने की दाल नदी अथवा तालाब में प्रवाहित करे. सोना धारण करे.
४) शंखपाल कालसर्प योग :
इस कालसर्प से पीड़ित होने पर व्यक्ति को आंर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है. और मानसिक तनाव भी झेलना होता है. इन्हें अपनी मां, ज़मीन, परिजनों के मामले में कष्ट भोगना पड़ता है.
उपाय: चांदी की डिब्बी में शहद भरकर घर के बाहर ज़मीन में दबाये.
५) पद्म कालसर्प योग :
इस योग में व्यक्ति को अपयश मिलने की संभावना रहती है. और इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को यौन रोग के कारण संतान सुख मिलना कठिन हो जाता है. उच्च शिक्षा में बाधा, धन लाभ में रूकावट व वृद्धावस्था में सन्यास की प्रवृत होने भी इस योग का प्रभाव होता है.
उपाय: घर में चांदी का ठोस हाथी रखे.
६)महापद्म कालसर्प योग :
इस योग से प्रभावित व्यक्ति मामा की तरफ से कष्ट पाता है एवं निराशा व हताशा के कारण ऐसा व्यक्ति व्यस्नों का आधीन हो जाता है. इन्हें काफी समय तक शारीरिक कष्ट भोगना पड़ता है. साथ ही प्रेम के मामलें में ये दुर्भाग्यशाली होते हैं.
उपाय: कुत्ता पाले एवं बहन की सेवा करे.
७) तक्षक कालसर्प योग :
इस योग के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में अशांति बनी रहती है. और कारोबार में भी साझेदारी लाभप्रद नहीं होती व मानसिक परेशानी देती है.
उपाय: लाल रंग की लोहे की गोली सदैव साथ रखे. एवं चांदी की डिब्बी में नदी का जल भरकर उसमें चांदी का एक टुकड़ा डालकर घर में रखे.
८) कर्कोटक (करकट) काल सर्प योग :
इस योग से प्रभावित व्यक्ति को आयु के सम्बन्ध में कई बार मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, अचानक अकस्मात् के योग बनते है. और जन्म महीने से हर आठवा महिना हानिकारक होता है.
उपाय: हर जन्म दिन पर चार पुजावाले नारियल नदी में प्रवाहित करे.
९) शंखचूड़ कालसर्प योग :
इस योग के कारण व्यक्ति जीवन में सुखों को भोग नहीं पाता है. इन्हें पिता का सुख भी पूर्ण रूप से नहीं मिलता है.और कारोबार में भी अक्सर नुकसानी का सामना करना पड़ता है.
उपाय: चने की दाल बहते पानी में प्रवाहित करे.
१०) घातक कालसर्प योग :
इस योग से प्रभावित व्यक्ति की गृहस्थी में कलह और अशांति बनी रहती है. साथ ही नौकरी एवं रोजगार के क्षेत्र में कठिनाईयों का सामना करना पड़ना है.
उपाय: पीतल के बर्तन में नदी या तालाब का जल भरकर घर के अंधेरे कोने में रखे.
११) विषधर कालसर्प योग :
इस योग से प्रभावित व्यक्ति को अपनी संतान से कष्ट भोगना पड़ता है. इन्हें नेत्र एवं हृदय में परेशानियों का भी सामना करना होता है. साथ ही स्मरण शक्ति अच्छी नहीं होती जिसके कारण उच्च शिक्षा में रूकावट एवं सामाजिक मान प्रतिष्ठा में कमी भी मिल सकती है.
उपाय: ४३ दिनों तक देव स्थान में मूली दान करे.
१२) शेषनाग कालसर्प योग :
इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के कई गुप्त शत्रु होते हैं जो इनके विरूद्ध हमेशा षड्यंत्र रचा करते हैं. ऐसे व्यक्ति को अदालती मामलो में उलझना पड़ता है. मानसिक अशांति और बदनामी भी इस योग में सहन करनी पड़ती है. हा पर यह है कि मृत्यु के बाद ऐसे व्यक्ति की ख्याति बहुत फैलती है.
उपाय: स्वर्ण धारण करे.
email : gurukrupajyotish@yahoo.in
- Home
- Contact Us
- product-जीवन सार पत्रिका और ग्रहो के रत्न
- ग्रहो के रत्न और इनके लाभ
- लाल किताब के अनुसार सभी ग्रहों के सामान्य उपाय
- काल सर्प दोष के प्रकार इनका प्रभाव और उपाय
- मंगल दोष एवं मंगल दोष का परिहार और सामान्य उपाय
- पितृ दोष और पितृ दोष के उपाय
- लाल किताब के अनुसार संतान संबंधी उपाय
- शनि की साडेसाती एवं ढैया और उपाय
- चांडाल योग और इसके प्रकार
- रविवार व्रत विधि विधान
- सोमवार व्रत विधि विधान
- मंगलवार व्रत विधि विधान
- बुधवार व्रत विधि विधान
- गुरुवार व्रत विधि विधान
- शुक्रवार व्रत विधि विधान
- शनिवार व्रत विधि विधान
- लाल किताब के अनुसार दान संबंधी विचार
- लाल किताब के अनुसार भवन संबंधी शुभाशुभ विचार
- दुकान या ओफ़िस मे वास्तुशास्त्र के नियम
- यन्त्र और मन्त्र शक्ति द्वारा वास्तुदोष निवारण
- श्री यन्त्र द्वारा वास्तुदोष निवारण
- पूर्व दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- पश्चिम दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- उत्तर दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- दक्षिण दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- इ॔शान दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- अग्नि दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- वायव्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष और निवारण
- फ़ेंगशूई और वास्तुदोष निवारण
- विझिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम
- वास्तुशास्त्र में विद्यार्थीओ के लिये मार्गदर्शन
- पूर्वाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- पश्चिमाभिमुख भवन के शुभाशुभ प्रभाव
- मकर संक्रांति का महत्व और विशेष उपाय
- होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- शनि जयंती पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- श्राद्ध का महत्व
- जन्माष्टमी पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय
- नवरात्रि व्रत विधि
- नवदुर्गा स्वरुप शैलपुत्री
- नवदुर्गा स्वरुप ब्रह्मचारिणी
- नवदुर्गा स्वरुप चंद्रघण्टा
- नवदुर्गा स्वरुप कूष्माण्डा
- नवदुर्गा स्वरुप स्कन्दमाता
- नवदुर्गा स्वरुप कात्यायनी
- नवदुर्गा स्वरुप कालरात्रि
- नवदुर्गा स्वरुप महागौरी
- नवदुर्गा स्वरुप सिद्धिदात्री