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* शुक्र के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए और शुक्र को बलि बनाने के लिए शुक्रवार का व्रत करना बहोत फलदायक है. यह व्रत अविवाहित स्त्री-पुरुष हेतु मनोकामना सिद्धि प्रदायक तथा दाम्पत्य सुख विवर्धक है एवं मांगलिक कार्य समाधान बने. यह व्रत स्त्री-पुरुष एवं कुमार-कुमारी सभी वर्ग हेतु फ़लप्रदायक है. इस व्रत को निम्न तरीके से पूर्ण श्रद्धा के साथ करे.
* शुक्रवार व्रत विधि :
- शुक्रवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से प्रारंभ करे और २१ या ३१
शुक्रवार तक करे.
-शुक्रवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके सफ़ेद वस्त्र धारण करे एवं यथासंभव सफ़ेद वर्ण की गाय के दर्शन तथा सर्वप्रथम १ या २ कन्या के
दर्शन करे और श्रीफ़ल प्रदान करे. तथा "ॐ द्रां द्रीं द्रौं स:
शुक्राय नम:"
इस बिज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे.
- इस दिन भोजन में दुध, दही, चावल, खीर, घी, साबुदाना, सफ़ेद मावा के पदार्थ, केला, जुवार, गेहु की रोटी आदि सफ़ेद वस्तुमात्र का ही सेवन करे. तथा अन्य कोइँ भी पदार्थ सेवन ना करे.इस दिन रात्रिशयन भी सफ़ेद चादर पर ही करे.
-अंतिम शुक्रवार को हवन क्रिया के पश्चात ६ कन्याओ को
उपरोक्त वस्तुओ का भोजन कराये तथा दक्षिणा स्वरूप सफ़ेद वस्त्र रुमाल, श्रुंगारिक वस्तु, चांदी का यथाशक्ति अनुदान
करे.
* व्रत कब नष्ट नहीं होता है : व्रत के दिन जल, सभी प्रकार के फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ या औषध सेवन करने से व्रत नष्ट नहीं होता है.
* व्रत कब नष्ट होता है : व्रत के दिन एक बार भी पान खाने से, दिन के समय सोने से, स्त्री रति प्रसंग आदि से व्रत नष्ट होता है
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