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 * घर के मुख्य द्वार से बाहर नीकलते समय उगते सूर्य के दर्शन हो एसे घर को पूर्वाभिमुख कहा जाता है. पूर्व दिशा के स्वामी इन्द्र है तथा सूर्य देव इस दिशा का प्रतिनिधित्व करते है. कालपुरुष के मुख पर इस दिशा का अमल होता है.

 

पूर्व दिशा के वास्तुदोष :

- पूर्व दिशा की जमीन उची हो एसे भवन में रेहनेवाला दरिद्र बनता जाता है.
- पूर्व दिशा में खाली स्थान छोडे बिना सरहद को छुकर निर्माण कार्य किये हुये भवन में रेहने से संतान प्राप्ति में अवरोध होता है.
- पूर्व दिशा में बनाया हुआ मुख्य द्वार अग्नि कोण की तरफ़ हो तो कोर्ट-कचेरी के विवाद, चोरी और आग का डर रेहता है.
- पूर्व दिशा में घर के समतल से बहार की बेदी उची बनायी हो तो अशांति, आर्थिक हानि ज्यादा होती है. जीसकी वजह से भवन में रेहनेवाला कर्जदार बन जाता है.
- पूर्व दिशा में बेकार का कचरा, मांटी के पथ्थर रखना धन और संतान की हानि दर्शाता है.
- पूर्व दिशा में खिडकीयाँ हो, शौचालय हो तो भी दोषकारक है.
 

पूर्व दिशा के वास्तुदोष निवारण के उपाय :

- इस दिशा के वास्तुदोष निवारण के लीये पूर्वदिशा में सूर्य यन्त्र स्थापित करे.
- इस दिशा के वास्तुदोष के कारण आरोग्य की समस्या रेहती हो तो हररोज प्रात​: सूर्यनमस्कार करे.
- हररोज प्रात​: सूर्य को अर्ध्य प्रदान करे और सूर्य उपासना करे.
- पूर्व दिशा के दरवाजे पर मंगलसूचक चिन्ह लगाये.
- पूर्व दिशा का भाग साफ़ और स्वच्छ रखे.
- हर रविवार को आदित्य ह्र्दय का पाठ करे.
- पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा लगाये.
- रोज सुबह देहलीज का पूजन करे और स्वस्तिक बनाये.
 

email : gurukrupajyotish@yahoo.in               

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