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* दुकान - घर - ओफ़िस - व्यवसायिक क्षेत्र या व्यापार क्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने के हेतु से और वास्तुदोष निवारण के लीये मांगलिक चिन्हो या यन्त्रो का प्रयोग कीया जाता है.


* नव ग्रहो के यन्त्र : आठ दिशाओ के अधिष्ठाता ग्रह स्थापित कीये हुए है. जिस दिशा का वास्तुदोष हो उसके निवारण के लीये उस ग्रह का सुचित यन्त्र द्वार पर या पूजा के स्थान में विधि-विधानपूर्वक स्थापित करने से वास्तुदोष के दुष्प्रभाव की असर कम होती है. यह ग्रहो के यन्त्र , उनकी रचना और स्थापित करने की विधि निम्न प्रकार है.

१) सुर्य यन्त्र :

* मन्त्र :
. ॐ धृणि: सुर्य आदित्य: !
. ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सुर्याय नम: !
.ॐ आदित्याय विह्महे दिवाकराय धीमही तन्नो सुर्य प्रचोदयात् !
- जप संख्या : ७०००
* किसी भी रविवार के दिन, रविपुष्य योग अथवा शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर रक्तचंदन से अनार की कलम से इस यन्त्र की रचना करे या तांबे के पत्र पर अंकित करे और घर में पुजा स्थान या मुख्यद्वार पर स्थापित करे. पुर्व दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये सुर्य यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

 २) चन्द्र यन्त्र :

* मन्त्र
. ॐ ऐं ह्रीँ सोमाय नम: !
. ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम: !
. दधि शंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम !
  नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुट भूषणम् !!
- जप संख्या : ११०००
* किसी भी सोमवार के दिन, अथवा शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर सफ़ेद चंदन से अनार की कलम से इस यन्त्र की रचना करे या चांदी के पत्र पर अंकित करे. वायव्य दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये चन्द्र यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

 ३) मंगल यन्त्र :

* मन्त्र :
. ॐ हूँ श्रीं मंगलाय नम : !
. ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम : !
. ह्रीं धरणीगर्भसंभूतं विध्युतकान्तिसमप्रभम !
  कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम् !!
* किसी भी मंगलवार के दिन, अथवा शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर रक्तचंदन से अनार की कलम से इस यन्त्र की रचना करे या तांबे के पत्र पर अंकित करे. दक्षिण दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये मंगल यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

४) बुध यन्त्र :

 * मन्त्र :

. ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम : !
. ब्रां ब्रीं ब्रौं : बुधाय नम : !
. ह्रीं प्रियंगु कलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम !
  सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम !!
- जप संख्या : ९०००
* किसी भी बुधवार के दिन, अथवा शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर अष्टघगंध से इस यन्त्र की रचना करे. उत्तर दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये बुध यन्त्र की स्थापना अवश्य करे. भोजपत्र पर १०० यन्त्र की रचना करे. ९९ यन्त्र पवित्र नदी में एक एक कर के प्रवाहित करे और यन्त्र ताविज में रखकर दाये हाथ में बांधे या घर के द्वार या पूजा के स्थान में स्थापित करे.

५) गुरु यन्त्र :

 * मन्त्र :
. ऐं क्लीं बृहस्पतये नम : !
. ग्रां ग्रीं ग्रौं स​: गुरवे नम : !
. ह्रीं देवानां ऋषिणां गुरु कांचनसंनिभम !
  बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम !!
- जप संख्या : ९०००
* किसी भी गुरुवार के दिन शुभ मुहुर्त अथवा गुरुपुष्यामृत योग में भोजपत्र पर केसर से इस यन्त्र की रचना करे. इशान दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये गुरु यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

६) शुक्र यन्त्र :

 * मन्त्र :
. ह्रीं श्रीं शुक्राय नम​: !
. द्रां द्रीं द्रौं स​: शुक्राय नम​: !
. ह्रीं हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम !
  सर्व शास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम !!
- जप संख्या : १६०००
* किसी भी शुक्रवार के दिन शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर सफ़ेद चंदन से इस यन्त्र की रचना करे. अग्नि दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये शुक्र यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

७) शनि यन्त्र :

 * मन्त्र :
. ऐं ह्रीं श्रीं शनेश्चराय नम​: !
. प्रां प्रीं प्रौं स​: शनेश्चराय नम: !
. ह्रीं नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम  !
  छायामातँड सभूतं तं नमामि शनैश्चरम !!
- जप संख्या : २३०००
* किसी भी शनिवार के दिन शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर काली स्याही से पीपल के मुल के पास बैठकर इस यन्त्र की रचना करे. पश्चिम दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये शनि यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.

८) राहु यन्त्र :

 * मन्त्र :
. ऐं ह्रीं राहवे नम : !
. भ्रां भ्रीं भ्रौं : राहवे नम​:  !
. ह्रीं अर्धकाय महा वीर्य चंद्रादित्य विमर्दम !
  सिंहिका गर्भ संभूतं तं राहु प्रणमाम्यहम !!
- जप संख्या : १८०००
* किसी भी शनिवार या बुधवार के दिन शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर अष्टघगंध से इस यन्त्र की रचना करे या तांबे के पत्र पर अंकित करे.

 ९) केतु यन्त्र :

 * मन्त्र :
. ऐं ह्रीं केतवे नम : !
. स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स​: केतवे नम​:  !
. ह्रीं पलाशपुष्प संकाशं तारकाग्रह मस्तकम !
   रौद्रं रौद्रांत्मकं थोरं तं केतु प्रणमाम्यहम !!
- जप संख्या : १८०००
* किसी भी शनिवार या बुधवार के दिन शुभ मुहुर्त में भोजपत्र पर इस यन्त्र की रचना करे या तांबे के पत्र पर अंकित करे. नैऋत्य दिशा के वास्तुदोष निवारण के लिये केतु यन्त्र की स्थापना अवश्य करे.



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